जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 6 of 52

ब्रज रज में लोटत रहौ, छांड़ि सकल जंजाल। चरन राखि विश्वास दृढ़, भजु राधा गोपाल॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25) लोटते रहो ब्रज रज में, छंदई पूर्णतया उजड़ गई। चरण राखी विश्वास द्रधा, भजु राधा गोपाल.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25)
ब्रज की लता-पता मोहि कीजैजद्यपि हम सब भाँति ही