जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 7 of 52

ब्रज-रज मैं लोटत रहौ, छोड़ि सकल जंजाल। चरन राखि विश्वास दृढ़, भजु राधा-गोपाल॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25) घूमते रहो ब्रज-रज में, छोड़ो सब झंझट। चरण राखी विश्वास द्रधा, भजु राधा-गोपाल.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25)
जद्यपि हम सब भाँति हीचिरजीवो होरी के रसिया।