चिरजीवो होरी के रसिया।
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 8 of 52
चिरजीवो होरी के रसिया।
नित प्रति आवौं मेरे होरी खेलन, नित गारी नित ही हँसिया॥ [1]
माथे मुकुट लकुट लीनें कर, पीत पिछौरी कटि कसिया।
हरीचन्द्र के नैंन सिरावो, राधा प्यारी कौ ये रसिया॥ [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेन्दु ग्रंथावली, होली (13)
चिरजीवो होरी के रसिया। हर दिन मेरा हरम खेला जाता है, हर दिन हंसिया पहना जाता है... [1] माथे पर मुकुट बुना जाता है और पीठ काटी जाती है। हरिचंद्र के नैनन सिरावो, राधा प्यारी कौ ये रसिया.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, होली (13)