नित्य बिहारिनि दासी कहत श्यामा के रस बस,

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 113 of 131

नित्य बिहारिनि दासी कहत श्यामा के रस बस, संतत श्याम अधीन दीन मन मोहन मृदु रस। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी नित्य बिहारिणी दासी कहती है, श्याम में बहुत रस है, संतत श्याम मेरे मन के वश में हैं, उनमें शीतल रस है। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी श्री राधारानी की दासी नित्या बिहारिणी आपको बता रही है कि हमारी श्री राधारानी अपने वचन तो छोड़िए ऐसे दुर्लभ रस की वर्षा करती हैं, जिसके रस के प्रभाव से श्याम सुंदर भी प्रतिदिन अत्यंत कष्ट में रहते हैं।
नवल वृन्दावन नवल बसन्तप्यारी जू मोकों कृपा करो