प्यारी जू मोकों कृपा करो

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 114 of 131

(राग गौरी) प्यारी जू मोकों कृपा करो, ऐसी रूचि उपजै जिए मेरे तुम्हीं न छिन्न बिसरो॥ [1] आपुन अपनी करि प्रेम बढ़ावहु, निज रस रीति सौं हियौ भरो। श्री बिहारी बिहारिनि दासी कहत यौं, विपिन विहार ढ़रो॥ [2] - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव की वाणी, सिद्धान्त के पद (186) (राग गौरी) प्रिय जू मोकोन कृपया, मुझे आपमें बहुत रुचि है, इसे जाने न दें। श्रीबिहारीबिहारी दासी कहते हैं, विपीन विहार में रहो.. [2] - श्रीबिहारीदेव,बिहारीदेव के वचन, सिद्धांत (186)
नित्य बिहारिनि दासी कहत श्यामा के रस बस,प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ