प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 115 of 131
(राग सारंग)
प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ।
जा जा अंग निरखत ए नैना तहीं तहीं रहत लुभाइ॥ [1]
नवल रूप अनूप माधुरी पान करत न अघाई।
श्रीबिहारीबिहारनिदासि अंग संग नख सिख रही हो समाइ॥ [2]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (181)
(राग सारंगा) प्यारी तेरे तन की शोभा बरनी ना जय। जा जा अंग निरखत ए नैना ताहिं ताहिं रहत लुभाई.. [1] नवल रूप अनुप मधुरी पुन करत न अघाई। श्री बिहार बिहार निदासी, तन सहित नख़ून सिखा रहे हो, समाई.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के छंद (181)