रसिकवर रसिकनी रस रासि
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 129 of 131
तिनको दरस देव दुर्लभ, जे आराधत राधाहिं।
भूवसि वृन्दावन नहिं सेवत, ते प्रानी पछिताहिं॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (169)
तीनों देव दुर्लभ हैं, मैं राधा को भजता हूँ। भुवासी, वृन्दावन की सेवा मत करो, शांति से रहो.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (169)