नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 13 of 131

रसिकन सों ऐंठे फिरें, बिमुखति भेंटत धाइ। ऊँट कपूर न सूँघई, टेढ़े काँटे खाइ॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (35) रसिकम का बेटा गुस्से में था और अपना बुरा चेहरा दिखा रहा था। उन्होंने कपूर सूँघा और टेढ़े-मेढ़े काँटे खाये.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज़, सिद्धांत के मित्र (35)
उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभरसिकवर रसिकनी रस रासि