उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 17 of 131
(सवैया)
उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ, परी प्रमान जुही सुक भाखी।
जाकौ सुजस बखाँनत श्रीमुख, स्याँमा स्याँम सहसमुख साखी॥ [1]
श्री बिहारीदास विस्वास तिहीं बल, उमंडि मैंड मरजादा नाँखी।
रह्यौं न मन भै भ्रम क्रम श्रम कछु, ब्रज रज काज कियो रज राखी॥ [2]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के कवित्त-सवैया (61)
(सवैया)उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ, परि प्रमाण जुही सुखा भाखी। जाकौ सुजस बखन्नत श्रीमुख, स्याम स्याम सहसमुख साखी। [1] श्रीबिहारीदास विश्वास तिहिन बल, उमंडी मैं मरजादा ननखी। रह्यौ न मन भाई माया क्रम श्रम कछु, ब्रज रज काज कियो राज राखी.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के काव्य-सवैया (61)