नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 22 of 131

प्रेम प्रेम ही उपजै, जो करै प्रेम की वारि। तब हि प्रेम फूलै फरै, यौं प्रेमिन कह्यौ पुकारि॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (88) प्यार प्यार पैदा करता है, जो कुछ भी प्यार में बदल जाता है। तभी प्रेम खिलेगा, मैं तुम्हें अपना प्रेमी कहूँगा.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज़, सिद्धांत मित्र (88)
बारक श्रीहरिदास विलोकतसुनि अहंकार भलौ न भिया।