सुनि अहंकार भलौ न भिया।

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 23 of 131

सुनि अहंकार भलौ न भिया। काहे कौं दुख सुख मानत मन, पैयत न बिना दिया॥ [1] बुधि विवेक भजन भरि राखत, मोहन हेरि हिया। श्री बिहारी दास प्रभु कियौ सु मान्यौ, यों जन जानि-जिया॥ [2] - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (88) सुनो अहंकारी, मत डरो। मन सुख-दुःख को बिना खरीदे क्यों स्वीकार करे? [1] बुद्धि, बुद्धि, भजन, भारी राखत, मोहन हेरी हिया। श्री बिहारी दास प्रभु कियौ सु मन्यौ, योन जन जानि-जिया.. [2] - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत श्लोक (88)
नामी नाम न भावईमेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी