मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 24 of 131
अब हौं कासौं बैर करौं।
ऐसे कहत पुकारें श्रीमुख, घट-घट हौं विहरों॥ [1]
तौ कहियत अपराधी जन, जो अज्ञा पग न धरौं।
दूजी किये ते बहुत बिगूचे, हौं हूँ नरक परौं॥ [2]
प्रानी सब समान अवलोकौं, भक्तनि अधिक डरौं।
बिहारीदास हरिदास कृपा तैं, नित निरभै बिचरौं॥ [3]
- श्री बिहारिन देव , श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (98)
अब मैं किससे घृणा करूं? श्रीमुख ऐसे पुकारता है, मैं धीरे-धीरे मुड़ रहा हूं.. [1] तुम मुझे अपराधी कहते हो, जो आज्ञा नहीं मानता। मैं दूसरे से बहुत बड़ा हूं, नरक में हूं.. [2] सभी प्राणियों को एक साथ देखने से भक्तों को अधिक भय होता है। बिहारीदास हरिदास मुझ पर दया करो, सदा निर्भय। [3] - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांतों के सिद्धांत (98)