मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 25 of 131

चाँपति चुपरति सेज पर, बिहारीदास मुख मौन। ठोड़ी सों एड़ी लगी, यह सुख समुझै कौन॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (104) चैनापति सभी ऋषियों के पार मौन रहे। कुछ देर बाद मुझे ये ख़ुशी किसने दी? - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (104)
मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासीस्याम सब ही के जिय की जानत हैं।