उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 29 of 131
(सवैया)
अम्बर सम्बर बास बसे, घमडे घनघोर घटा घँहराँनी।
जद्दपि कूल करारनि ढाहति, आंनि बहै पुल ही तर पाँनी॥ [1]
श्रीबिहारिनिदासि उपासित यौं, निरनै करि श्रीहरिदास बखाँनी।
सबै परजा ब्रजराज हूँ लौं, सर्वोपरि कुंजबिहारिनि राँनी॥ [2]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के कवित्त-सवैया (110)
(सवैया) अंबर सांबर बास बेस, घमदे घनघोर घाट घनहरनी। सभी कारणों के नष्ट हो जाने पर भी सब कुछ धुल जाता है। मैं संपूर्ण विश्व की ब्रजराज हूं, मैं परम कुंजबिहारिणी रानी हूं.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत काव्य-सवैया (110)