हरि मोहिं यों अपनाय लियौ।

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 31 of 131

हरि मोहिं यों अपनाय लियौ। जहाँ जहाँ बिघन जान्यौ अपने कों, तहाँ तहाँ जतन कियौ॥ [1] हौं तौ पतित अपराधी अतिसै, कृपा कटाक्षि जियौ। श्रीबिहारीदास प्रभु अति करुनामय, प्रगट प्रसाद दियौ॥ [2] - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (118) हरि मोहिं ऐसे ले चलो। जहाँ भी अपने को संकट में पाओ, कहीं न कहीं मुझे बचाने का प्रयत्न करो.. [1] मैं गिरा हुआ अपराधी हूँ, कृपया व्यंग्यपूर्वक जियो। श्री बिहारीदास प्रभु बड़े दयालु हैं, प्रगट प्रसाद दिया.. [2] - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत (118)
उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभनामी नाम न भावई