नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 42 of 131

कोऊ गोबर पाथनी, कोऊ ढोवै पाई। कोऊ सुहागिल लाड़िली, बोलत हूँ अलसाई॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (145) कितना गोबर पाया जाता है, कितनी अच्छी तरह धोया जाता है। क्वो सुहागिल लड़ैली, बोलत हुन अलसाई.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (145)
मेरे विषै विसन वर वाममेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी