मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 43 of 131
मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी।
जिनकें प्रान जीवनि धन राधा वृन्दाविपिन विलासी। [1]
सँग सहचरी श्रीहरिदासी मोहि सहायक उभैं उपासी॥
श्रीबिहारीदास निरभै भजि हरि पद तजि लोक वेद की हांसी॥ [2]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (145)
मेरी शैली ब्रजपति और ब्रजवासी की है। जिनके प्राण, प्राण और धन राधा वृंदाविपिन विलासी। [1] सहचर श्री हरिदास मोहि, सहायक उभैण उपासी.. श्री बिहारीदास निर्भय भाजी हरि पद तजि लोक वेद की हांसी.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत श्लोक (145)