प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 45 of 131

(राग सारंग) प्यारी जू सुंदर वदन तिहारौ। निरखि निरखि प्रीतम सचुपावत निमुषहु होत न न्यारौ॥ [1] मंद हासि परिहासि परस्पर नव नव नेह निहारौ। श्रीबिहारीबिहारनिदासि रहसि रस वृन्दाविपिन विहारौ॥ [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (180) (राग सारंगा) प्यारी जु सुन्दर वदन तिहारौ। निरखि निरखि भूत सचुपवत निमुसाहु होता न न्यारो। श्री बिहार बिहार निदासि रहसि रस वृंदाविपिन विहारौ.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के छंद (180)
मेरे विषै विसन वर वाममेरौ मन श्रीवृन्दावन अटक्यौ।