प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 47 of 131

तहाँ नहीं कछु श्रम तम न ग़म विरह भ्रम मान लवलेश प्रवेश न प्रसंगी। - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (160) वहां कोई परिश्रम नहीं, कोई दुख नहीं, कोई दुख नहीं, कोई अलगाव नहीं, कोई उलझन नहीं, प्रेम का प्रवेश नहीं, कोई प्रश्न नहीं। - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रास के छंद (160) अखण्ड नित्य विहार रास में न श्रम है, न अन्धकार, न दुःख, न वियोग, न माया, न मन के प्रेम का लेशमात्र भी प्रवेश हो सकता है, न इसका कोई प्रश्न है।
मेरौ मन श्रीवृन्दावन अटक्यौ।नामी नाम न भावई