कहों री जो कहिबे की होइ
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 52 of 131
(राग सारंग)
कहों री जो कहिबे की होइ।
श्रीबिहारी बिहारनि कौ सुख सखी री, जानत नाहिने कोइ॥ [1]
प्रेम मगन रस मत्त रहत नित, तन मन प्रान समोइ।
श्रीबिहारीबिहारनिदासि लडावत, अंग संग रही भोइ॥ [2]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (182)
(राग सारंगा) जो कहा गया वह कहो। श्रीबिहारीबिहारी, कौन जाने सुख का साथी? [1] मैं हर दिन प्यार के नशे में रहता हूं, मेरा शरीर, मन और आत्मा आराम में हैं। श्री बिहार बिहार निदासी की लड़ाई, भाई का समर्थन.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के छंद (182)