नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 54 of 131

विभचारनि कौ संग तजि, भजि अनन्य निहकाँम। श्रीबिहारीदास सुख में सुखी, दंपति रति धन धाँम॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (186) विभाचरणी किसके साथ रहती है, क्या मैं बिना किसी हिचकिचाहट के दूसरों की पूजा करती हूं। श्री बिहारीदास सुख पुरुष सुखी, दानपति रति धन धनम्.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (186)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई