नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 55 of 131
माला जनेऊ घालि गरै, दुरै न साकत सूद।
वृति कृति तें जानियैं, डौंम क़ौम दाऊद॥
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (190)
जनेऊ की माला धीरे-धीरे गिरती है, दुराई पहनी नहीं जा सकती। वृत्ति कृति तेन जनियैं, दाम कौम दौड़.. - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (190)