नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 61 of 131
पाँडे माटी में सनैं, करमठ निपट निकोर।
प्रेम पदारथ क्यौं गहैं, अरुझे लहै न छोर॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (320)
पांडे मेरा मन साफ, मेहनती निपक निकोर। प्रेम की वस्तु क्यों नहीं, इसका कोई अंत नहीं.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत के मित्र (320)