मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 64 of 131

नस्वर रज लगि जूझई, नस्वर पूत कहाइ। श्रीवृन्दावन सेये रहैं, सो रज माहिं समाइ॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (332) नश्वर साम्राज्य संघर्ष करने लगा, जिसे नश्वर पुत्र कहा जाता है। यदि आप श्री वृन्दावन में रहते हैं, तो आप राज्य में शामिल हैं.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (332)
मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासीनामी नाम न भावई