नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 65 of 131
जे पैसनि माँनत भलौ, तिन तैं प्रेम है दूर।
पैसा साकत भूत के, खात परै मुँह धूर॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (355)
जे पैसानि मन्नत भलाउ, तिन ते प्रेम है दुर। धन भूत समान, बिस्तर पराया... - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सखा सिद्धांत (355)