नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 71 of 131
आरति करत बिहार की, सब आरति बिसराई।
आगि बारि आरति करैं, सेवत ख़सम खिजाइ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (370)
बिहार की आरती उतारी, भूली सब आरती। आगि बारी आरती करीं, सेवत खसम खिजै.. - श्री बिहारिन देव जी, सिद्धांत के मित्र श्री बिहारिन देव जी की वाणी (370)