नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 85 of 131
बलिहारी जाऊँ जक परी, बातन बहुत दंडौत।
पालत देह कुटुंब कौं, भले समझि भागौत॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (660)
बलिहारी जौन जक परी, बातन की बहुत महिमा है। कौन सा परिवार शरीर को फिराता है, भले ही आप अपने आप को भक्त मानते हों.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (660)