प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 87 of 131

ऐसी स्वामिनी साहिबिनी, रसिक अनन्य उदार। श्री बिहारिनिदासि प्रसन्न ह्वै, दियो अहार विहार॥ - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (150) ऐसी स्वामिनी, स्त्री, प्रेमिका और उदार। श्री बिहारिनिदसी प्रसन्न ह्वै, देव आहार विहार.. - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जू की आवाज, सिद्धांत की साखी (150)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई