नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 88 of 131
अवध उड़ीसा द्वारिका, बद्री अरु केदार।
ए न होहिं हरिदास के, समाईं न नित विहार॥
- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (237)
अवध उड़ीसा द्वारका, बद्री और केदार। ई एन होहिं हरिदास के, समन एन नित विहार.. - श्री बिहारिन देव, सिद्धांत के मित्र बिहारिन देव जी की वाणी (237)