बसीवो श्री वृन्दावन को नीकौ
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 89 of 131
(राग कलिंगडा)
बसीवो श्री वृन्दावन को नीकौ,
छिन्न छिन्न प्रति अनुराग बढ़त दिन, दरस बिहारीजी कौ॥ [1]
नैंन श्रवण रसना रस अँचवत, अंग संग प्यारी पी कौ ।
श्री बिहारी बिहारिनि दासी, अंग संग बिछुरत नाहीं कौ॥ [2]
- श्री बिहारिन देव - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त के पद (185)
(राग कलिंगदा) बसिवो श्री वृन्दावन को निकौ, छिन्न छिन्न प्रति अनुराग बधत दिन, दरस बिहारीजी कौ.. [1] नैनन श्रवण रसना रस अंचवत, अंग संग प्यारी पी कौ। श्री बिहार बिहारिणी दासी, जो शरीर से अलग नहीं है.. [2] - श्री बिहारिन देव - श्री बिहारिन देव जी के शब्द, सिद्धांत (185)