भाइ बिना भटकट फिरे, परमार्थ व्यौहार।

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 90 of 131

भाइ बिना भटकट फिरे, परमार्थ व्यौहार। भूखौई घर परी रहै, बिना आहार विहार॥ -.श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (538) भई आग बिना भटके, परोपकारी आचरण। घर में भूखा रहना, बिना भोजन के.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत के मित्र (538)
बसीवो श्री वृन्दावन को नीकौभक्ति भाव विस्वास न उपजे