नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 96 of 131
जा रज सौं जग रज कहै, सो रज कज है जाइ।
साँची रजहि न सेवहीं, श्री वृन्दावन आई॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (333)
जय राज हर जग में राज है, तो राज काम है। जय। सांची राजहिं न सेवहिं, श्री वृन्दावन ऐ.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (333)