प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 10 of 40
धनि व्रजवासी नारि नर, धनि वृन्दावन धाम।
नारायण सुरपति जिन्हें, निशदिन करत प्रणाम॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवलसखी दान लीला (01)
धनि व्रजवासी नर-नारी, धनि वृन्दावन धाम। नारायण सुरपति, जिनको मैं प्रणाम करता हूं निषादिन को.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवलसखी दान लीला (01)