प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 9 of 40
ब्रजमण्डल के बास की, करत चतुर्मुख आस।
नारायण ते धन्य हैं, जिनको नित्य निवास॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (1)
यह ब्रजमंडल के अंतर्गत है, करत चतुर्मुख आस. धन्य हैं नारायण, जिनका शाश्वत निवास है.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (1)