गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 11 of 40

(राग कालिंगड़ा धीमाताल) गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे। आदि अनन्त सार निगमागम, जाहि नवत सुरनर मुनि अज रे॥ [1] दंभ कपट कामादि मान मद, इन बैरिनको तुरतहि तज रे। नारायण मन करु सतसंगति, काल ब्यालते निर्भय गज रे॥ [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (8) (राग कलिंगड़ा धीमतला) गोविंद गोविंद गोविंद भज रे। आदि अनंत सार निगमम्, जाहि नववत सुरनार मुनि अज रे.. [1] धन में, छल में, अहंकार में, वासना में, बारिंको में, तुम इसे तुरंत रोको। नारायण मन करु सत्संगति, कल ब्यालते निर्भय गज रे.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धांत (8)
प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहैमनमोहन जाकी दृष्टि परत