मन चेतु नहीं पछितावैगो

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 18 of 40

(राग काफी) मन चेतु नहीं पछितावैगो। भजिलै रे श्रीनंदनँदनको, जो तोहि पार लगावैगो॥ [1] झूठ साँच को ब्योहारन सों, कहँ लगि द्रव्य कमावैगो। निशि बासर याही चिंता में, रो रोके मरि जावैगो॥ [2] जिनके काज अनीति करत तू, काउ काम नहिं आवैगो। जब यमदूत तोहि पकरेंगे, तब न कछू बस्यावैगो॥ [3] नारायण तेरी-मेरी में, योंहीं उमरि गमावैगो। अन्त समय ढिंग आय गयो अब, फिर कब हरिगुण गावैगो॥ [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (5) (बिल्कुल चीर) मन चेतु नहिं पछितावैगो। भजीलै रे श्रीनन्दनन्दनको, जो तोहि पार रावो.. [1] झूठे सांचे के पूत, क्या काम आयेंगे। निशि बसर याहि चिंता, रो रोके मारि जावैगो.. [2] जिनके साथ तुम बुरा करोगे, वे तुम्हारे काम नहीं आएंगे। जब यमदूत तुम्हें बुलाएँगे तो मैं कुछ नहीं कहूँगा.. [3] नारायण मैं तुम्हारा आदमी हूँ, ऐसे ही रहूँगा। अंत समय तो अब गया, हरिगुण कब जायेंगे.. [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धांत (5)
गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रेमनमोहन जाकी दृष्टि परत