आज इन दोउन पै बलि जैये
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 2 of 40
(राग बिलावल)
आज इन दोउन पै बलि जैये।
रोम रोम सों छबि बरसत है, निरखत नैन सिरैये॥
रूप रास मृदु हास ललित मुख, उपमा देत लजैये।
नारायण या गौर श्याम कों, हिये निकुंज बसैये॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (52)
(राग बिलावाला) आज मैं इन दो स्थानों पर जाता हूं। रोम-रोम से झलकती है वर्षा, नैन हैं निराकार। रूप की सुन्दरता कोमल है, सुन्दर मुख उपमा दे रहा है। नारायण या गौर श्याम कोण, हिये निकुंज बसैये.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (52)