आवौ सखी मिलि मंगल गावौ
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 3 of 40
(राग जैजैवन्ती)
आज विराज रहे मणि मंदिर,
नंदनँदन वृषभानुकिशोरी। [1]
केलि करत युग याम गई निशि,
लेत जम्हाई साँवरो गोरी॥ [2]
अति आलस वश झूमत दोऊ,
बात करत मुख अटपटि भोरी। [3]
नारायण सोई बड़भागी,
जो नित निरखत है यह जोरी॥ [4]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (4)
(राग जयजयवंती) अज विराजे मणि मंदिर, नंदनंदन वृषभानुकिशोरी। [1] केलि करत युग यम गै निशि, लेत यमहै सावंरो गोरी.. [2] अत्यधिक आलस्य के कारण आप झूलते हैं, लेकिन आपका चेहरा बदसूरत हो जाता है। [3] नारायण सोई बड़भागी, जो सदा अलिखित.. [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (4)