प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 20 of 40

(राग मल्हार) मनमोहन सम सुन्दर को है। मैं अपने अनुमान कहूँ अब, उनकी पटतर और न सोहै॥ [1] चितवन चपल रूप उजियारो, जाकों मुख नित चन्दहु जोहै। नारायण जो एक दृष्टि में, सुर नर नाग सकल को मोहै॥ [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (4) (राग मल्हारा) मनमोहन सैम सुन्दर के लिए है। अब मैं आपको अपना अनुमान बताता हूं, इसका पतातर और एन सोहै.. [1] चितवन चपल रूप उजियारो, जकों मुख नित चंदू जोहै। नारायण, जो एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं, नर नाग सकाल को मोहित करते हैं.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (4)
मनमोहन जाकी दृष्टि परतमोहि मति रोकै री तू एरी ब्रज नागरी