प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 22 of 40
निरख निरख शोभा हर्ष, पिय हिय होत अपार।
डरत डरत बिनती करत, जै श्री राजकुमार॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (93)
सौन्दर्य का रूप कठोर है और प्रेम अपार है। दरत दरत बिनाति करत, जय श्री राजकुमार.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मन लीला दोहावली (93)