प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 23 of 40
पंकज विषधर मीन मृग, सर खंजन बादाम।
प्यारी तेरे दृगन के, यह बिन दाम गुलाम॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (94)
पंकज विषधर मिन मृग, सर खंजन बादाम। तेरे अजगर का प्यारा, ये बंधनमुक्त दास.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मन लीला दोहावली (94)