साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 29 of 40
(राग देश)
साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान।
सो तौ भई घायल ताही छिन, बिन बरछी बिन बान॥
कल नहिं लेति धरति नहिं धीरज, तलफति मीन समान।
नारायण भूली सुधि तन की, बिसर गयो सब ज्ञान॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (7)
(राग देश) सांवरे की जिन निरखि मुसिक्यन। तो भाई, तुम घायल हो, छीने गए, बिना बैसाखी के, बिना सहारे के... धरती कल नहीं लेती, उसमें धैर्य नहीं, वह हारी हुई लगती है। नारायण भूल गये देह की याद, भूल गये सारा ज्ञान.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (7)