सखि नँदलाल न आवन पावै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 31 of 40
(राग पीलू)
सखि नँदलाल न आवन पावै।
भीतर चरन धरन जिन दीजो, चाहे जिते ललचावैं॥ [1]
ऐसनको बिस्वास कहा री कपट बैन बतियावैं।
'नारायन' इक मेरे भवन तजि अनत चहे जहँ जावैं॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मानलीला (5)
(राग पीलू) सखी नंदलाल न आवन पावै। जो मेरे पाँव पकड़ते हैं, वे मुझे प्रलोभित करें। [1] जिन्हें मैं विश्वास कहता हूं, उन से मैं कहता हूं, धोखा न खाओ। मैं संसार में जहाँ भी जाऊँ, 'नारायण' ही मेरा महल है.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मनलीला (5)