प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 35 of 40

(राग मल्हार) नन्दनन्दन बन बंशी बजाई री। श्रवण करत सुधि रही न तन की, एक संग मो मति बौराई री॥ [1] नयन चकोर चहत निरखन कों, शरद चन्दमुख कुँवर कन्हाई री। नारायण नहिं भवन सुहावत, कहा करूँ अब एरी माई री॥ [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वंशी लीला (4) (राग मल्हारा) नन्दनन्दन बंशी बंशी री री। सुनत सुनत तन मन तुमको याद करो, मैं तुम्हारे साथ.. [1] नयन चकोर चाहत निरखण कोन, शरद चंद्रमुख कुँवर कन्हाई री। नारायण नहीं भवन सुहावत, कहूँ अब एरी माई री.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वंशीय लीला (4)
प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहैप्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै