प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 36 of 40
(राग मल्हार)
विहरत बाग झूलन के काजे।
गावत गीत मधुर सुर दोऊ, बीच बीच मुरली धुनि बाजें॥ [1]
ठुमकि चलन बोलन अवलोकन, कोटि मदन छबि निरखत लाजें।
नारायण हुलसत सुख बिलसत, लता भवन तरें आय बिराजें॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वन झूलन लीला (8)
(राग मल्हारा) विहारत बाघ झूलन के कारण। गावत गीत मधुर सूर जोड़ी, बिच बिच मुरली धुनि बाजन.. [1] ठुमकी चलन बोलन पर्वशम, कोटि मदन छबि निरखत लाजन। नारायण सुन्दर है, सुख सुन्दर है, लता भवन तारों भरा है। [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वन झूलन लीला (8)