प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 37 of 40

विनय करूँ कर जोर, रसिक जनन के चरण में। ‘नारायण' चितडोर, लगी रहे नित युगल पद॥ - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (1) विनय करुण कर जोर, रसिक जनन चरण पुरुष। 'नारायण' चिताडोर, दोहे नित गाये जा रहे हैं.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मन लीला दोहावली (1)
प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहैया साँवरे सों मैं प्रीति लगाई