आवौ सखी मिलि मंगल गावौ

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 5 of 40

(राग जैजैवन्ती) आवौ सखी मिलि मंगल गावौ, मेरे पधारे कुँवर कन्हाई। [1] मोसम आज कौन बड़भागिनि, घर बैठे ऐसी निधि पाई॥ [2] सुंदर वदन मदन मनमोहन, मधुर मधुर बोलत सुखदाई। [3] नारायण इनके दरशन सों, मुरझी बेलि हरी ह्वै आई॥ [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (15) (राग जैजैवंती) हे सखी, मेरे पास आओ कुँवर कन्हाई। [1] आज जो मौसम ख़राब है, निधि घर में पाई बनकर बैठी है.. [2] सुन्दर स्वर मदन मनमोहन, मधुर मधुर स्वर। [3] नारायण उनके दर्शन पुत्र, मुराजि बेलि हरि हवै ऐ.. [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (15)
आवौ री यह शोभाऐसो आनन्द सखी आज लों न देखो कबूँ