कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी
Verse 2 of 12
(कवित्त)
काली कहै मो मैं है रु सिव कहै मो मैं है रु,
ब्रह्मा कहै मो मैं जाको थाह ना परत है। [1]
इंद्र कहै मो मैं है बरुन कहै मो मैं है रु,
कहत कुबेर नित ध्यान कौ धरत है॥ [2]
जम कहै मो मैं है रु सेस कहै मो मैं है रु,
ब्रजनिधि सबहू कृपालना करत है। [3]
तीन लोक को ही नाथ ताके सब विस्व हाथ,
सो तौ ब्रजरानी पग जावक भरत है॥ [4]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (23)
(कविता) काली कहते हैं मो मैं रू हूं, शिव कहते हैं मो मैं रू हूं, ब्रह्मा कहते हैं मो मैं जाता हूं, कोई परत नहीं है। [1] इंद्र कहते हैं मैं रू हूं, बरुण कहते हैं मैं रू हूं, कुबेर कहते हैं जो सदैव ध्यान देते हैं.. [2] जाम कहते हैं मैं रू हूं, सेस कहते हैं मैं रू हूं, कहते हैं सबका कल्याण करने वाला ब्रजनिधि. [3] तीनों लोकों को नमस्कार, तभी तो भारत है ब्रजरानी कदम आगे.. [4] - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (23)