कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी
Verse 3 of 12
कुँवरि किसोरी नवल पिय, करत परस्पर हेत।
तनिक मधुर मुसकाइकै, ‘ब्रजनिधि’ मन हरि लेत॥
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (45)
कुंवारी लड़कियां एक दूसरे के लिए पीती हैं पानी और करती हैं ये काम. थोड़ी सी मधुर मुस्कान, 'ब्रजनिधि' मन हरि देर.. - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (45)