कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत

Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी

Verse 4 of 12

लोक चतुर्दस ही सदा, हरि चरनन नित ध्यान। वहै कृष्ण राधे चरण, अलता देत सु आन॥ - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज शृंगार (112) लोक चतुर्दस सदा, हरि चरणन नित ध्यान। वाहय कृष्ण राधे चरण, आलता देत सु अन.. - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (112)
कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेतश्री राधा सुख चंद देखि